जैसे जैसे समय बीतता गया, फ़ातिमा और ग़िनवा भुट्टो की परेशानी बढ़ती गई. जब उनसे नहीं बर्दाश्त हुआ तो उन्होंने अपनी माँ से कहा कि वो अपनी बुआ 'वादी को इस्लामाबाद फ़ोन करने जा रही हैं. बाद में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, "मेरे घर के आसपास काफ़ी पुलिस तैनात थी. जब बहुत देर तक मेरे पिता नहीं आए तो मैंने अपनी बुआ को फ़ोन करने का फ़ैसला किया. काफ़ी देर बाद उनके पति आसिफ़ ज़रदारी फ़ोन पर आए." "उन्होंने कहा कि मैं बुआ से बात नहीं कर सकती. मैंने जब ये क हा कि ये बहुत ज़रूरी है तो उन्होंने कहा कि वो फ़ोन पर नहीं आ सकतीं. जब मैंने बहुत ज़ोर डाला तो उ न्होंने बहुत ठंडेपन से कहा कि तुम्हें पता नहीं कि तुम्हारे पिता को गोली लग गई है." फ़ातिमा और उनकी माँ गिनवा जल्दी से कार में बैठ कर मिडईस्ट अस्पताल पहुंचीं. बाद में फ़ातिमा भुट्टो ने अपनी आत्मकथा में लिखा, "मुझे याद है जब मैं अस्पताल में घुसी तो मुझे अपने पिता के पैर दिखाई दिए. मैं समझी कि मैं नीचे गिर डाउंगी. ममी दौड़ कर पापा के पास गईं. वो एक नीची पलंग पर बेहोश लेटे हुए थे. मेरी माँ ज़ोर से चिल्लाईं, ...