दरअसल, फ़ॉर्मेल्डिहाइड एक रंगहीन , तेज़ गंध वाला और ज्वलनशील रसायन है. इसका इस्तेमा ल घर में इस्तेमाल होने वाले क ई उत्पादों में किया जाता है. इसके अलावा इसका उपयोग फंगस ख़त्म करने, कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है. क ई बार इसका प्रयोग प्रीज़र्वेटिव के तौर पर भी किया जाता है. फ़ॉर्मेल्डिहाइड की कुछ मात्रा तो हवा में भी मौजूद होती है लेकिन अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए तो आं खों में पानी, जलन, नाक और गले में जलन, खांसी और चक्कर आने की शिकायत हो सकती है. कई बार कुछ लो गों को स्किन इंफ़्केशन भी हो जाता है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फ़ॉर्मेल्डिहाइड की अधिक मात्रा की वजह से कैंसर भी हो सकता है. नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में प्र काशित रिपोर्ट के मुताबिक़, फ़ॉर्मेल्डिहाइड के संपर्क में आने से ज हां आंखों में जलन जैसी शिकायत हो सकती है वहीं इसके दूरगामी प्रभाव भी हो सकते हैं. साल 1980 में प्रयोगशाला में हुए एक अध्ययन में यह भी दावा किया गया था कि इसके संपर्क में आने से चूहों में नाक का कैंसर हो गया. जिसके बाद 1987 में एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी ने भी माना कि इसकी बहु ...