Skip to main content

के हवाले से 'चौकीदार चोर है' कहने पर राहुल को खेद

दरअसल, फ़ॉर्मेल्डिहाइड एक रंगहीन, तेज़ गंध वाला और ज्वलनशील रसायन है. इसका इस्तेमाल घर में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पादों में किया जाता है. इसके अलावा इसका उपयोग फंगस ख़त्म करने, कीटाणुनाशक के रूप में किया जाता है. कई बार इसका प्रयोग प्रीज़र्वेटिव के तौर पर भी किया जाता है.
फ़ॉर्मेल्डिहाइड की कुछ मात्रा तो हवा में भी मौजूद होती है लेकिन अगर इसकी मात्रा बढ़ जाए तो आंखों में पानी, जलन, नाक और गले में जलन, खांसी और चक्कर आने की शिकायत हो सकती है.
कई बार कुछ लोगों को स्किन इंफ़्केशन भी हो जाता है.
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फ़ॉर्मेल्डिहाइड की अधिक मात्रा की वजह से कैंसर भी हो सकता है. नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, फ़ॉर्मेल्डिहाइड के संपर्क में आने से जहां आंखों में जलन जैसी शिकायत हो सकती है वहीं इसके दूरगामी प्रभाव भी हो सकते हैं.
साल 1980 में प्रयोगशाला में हुए एक अध्ययन में यह भी दावा किया गया था कि इसके संपर्क में आने से चूहों में नाक का कैंसर हो गया. जिसके बाद 1987 में एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी ने भी माना कि इसकी बहुत अधिक मात्रा से कैंसर होने का ख़तरा हो सकता है.

दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाली डॉ. दिपाली भी कुछ यही कहती हैं. उनका कहना है कि फॉर्मेल्डिहाइड सिर्फ़ बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि बड़ों के लिए भी उतना ही ख़तरनाक है. वो कहती हैं कि अगर त्वचा बहुत अधिक इसके संपर्क में आ रही है तो कैंसर का ख़तरा भी हो सकता है.
धूप में तपते रेत के टीलों की लम्बी क़तारें पार करते हुए हम जैसलमेर से कुल 150 किलोमीटर दूर राजस्थान के बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र के आख़िरी गांव 'मुरार' पहुंचते हैं.
भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित इस आख़िरी गांव में ही मौजूद है थार रेगिस्तान के बीचों बीच खड़ा भारत का आख़िरी पोलिंग स्टेशन.
'न्यूटन' फ़िल्म की याद दिलाते हुए 6 निर्वाचन अधिकारियों की टीम आज चुनाव करवाने के लिए 'मुरार का तला प्राथमिक विद्यालय' नामक इस पोलिंग बूथ पर पहुंची.
वो कहती हैं "अमूमन इस रसायन का इस्तेमाल शैंपू को झागदार बनाने के लिए किया जाता है. लेकिन जिन प्रोडक्ट्स में इसकी मात्रा बहुत अधिक हो उससे बचना चाहिए. ख़ासतौर पर बच्चों के लिहाज़ से..."
दिपाली के अनुसार, ये एक बहुत महीन रसायन होता है. जो शरीर के रोम-छिद्रों और दूसरे छिद्रों से रक्त-कोशिकाओं में चला जाता है और इसकी वजह से कोशिकाएं टूटने लगती हैं, जो कैंसर का कारण बन सकता है. ऐसे में कोशिश करें कि नेचुरल और ऑर्गेनिक चीज़ों का ही इस्तेमाल करें.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
बूथ इंचार्ज सत्यनारायण ने बीबीसी को बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा इस पोलिंग बूथ से मात्र 2 किलोमीटर दूर है.
आर्मी और बॉर्डर सेक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) से घिरे इस संवेदनशील क्षेत्र में सुबह 8 बजे से ही मतदाता वोट देने के लिए क़तार में खड़े थे.
इस बूथ तक पहुंचने के अपने अनुभव के बारे में बताते हुए निर्वाचन अधिकारी सत्यनारायण बताते हैं, "यह जैसलमेर का सबसे दूरस्थ पोलिंग बूथ ये है. कल सुबह जैसे ही हमको बताया गया की इस बार चुनाव में हमारी ड्यूटी इस बीहड़ में बॉर्डर के पास लगी है तो हमारे दिल में भी बहुत जिज्ञसा हुई. हम सोच में भी पड़ गए की बॉर्डर के सबसे पास का गांव आपको मिला है तो यहां पता नहीं कैसा माहौल होगा. लेकिन लोगों में उत्साह है और मतदान सभी नियम क़ानून के अनुसार हो रहा है."
इस बूथ पर 2012 के काम कर रहे निर्वाचन अधिकारी रामअवतार मीणा बताते हैं, "यहां इस पोलिंग बूथ के अंतर्गत 6 ढानियाँ (छोटे गांव) आती हैं. यहां की बहुत मुश्किल परिस्थितियां हैं. एक ढानी जो बूथ से 40 किलोमीटर दूर है तो दूसरी यहां से 60 किलोमीटर दूर है. लेकिन दूर दूर से मतदाता यहां वोटिंग करने के लिए आते हैं. उसी तरह चुनाव के पहले मैं भी उनसे मिलने के लिए दूर दूर तक जाता हूं और उन्हें वोट डालने जाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं."
कई मतदाताओं ने यहां मतदान करने के लिए 10-10 किलोमीटर का रेगिस्तान पैदल पार किया.
कर्मावली गांव के रहमान बताते हैं कि वो सूरज उगने से पहले ही वोट देने के लिए अपने ढानी से निकल पड़े थे.
वो कहते हैं, "मेरा गांव तो बारह किलोमीटर दूरी है लेकिन मैं हर बार वोट डालने के लिए यहां आता हूं. घड़ी तो नहीं देखी लेकिन आज सुबह भी सूरज उगने से पहले ही घर से निकला पड़ा और पैदल पैदल रेगिस्तान पार करते हुए अब यहां आ पहुंचा हूं."
वहीं अपने गांव के साथियों के साथ कुछ दूरी पर रेत में बैठे फतेह ख़ान वोट देने के बाद सुस्ता रहे थे.
पूछने पर वह कहते हैं, "सुबह से चलते चलते थक गया हूं. वोट देने आने के लिए मुझे बहुत दूर तक चलना पड़ा. यहां सभी लोग बहुत दूर दूर से आते हैं. कुछ लोग जीप किराए पर लेकर आते हैं तो कुछ मेरी तरह पैदल...क्योंकि यहां रास्ते नहीं हैं और आने जाने के लिए रेत में गाड़ी का साधन भी नहीं है."

Comments

Popular posts from this blog

هل تعلمين أن بإمكانك شراء "دروع الثدي" لحماية الحلمات؟

وحين يأتي أوان الرحيل، تتبادل الأم العناق والدموع مع الممرضات والأطباء. ويأتي داناواي لإلقاء الوداع، وكذلك جيلاني بعد أن أنهى لتوه عملية. لقد ا رتبط بشدة بالأسرة وبات يشعر بفخر واضح برؤيته للبنتين وقد تحسنتا بما يكفي لمغادرة المستشفى. ستمكث صفا ومروة والأسرة في لن دن للأشهر الستة المقبلة على الأقل، بينما تخضع البنتان للعلاج ا لطبيعي والفحوص الطبية في حين تعتزم أسرتهما العودة لباكستان مطلع 2020. وإذ يتركون المستشفى وراءهم، والتي كانت بمثابة منزل لهم طوال 11 شهرا، لا تشك زينب في أنها اتخذت القرار الصحيح بفصل البنتين. و تقول: "أنا سعيدة بالتأكيد لأني أمهما. أستطيع الآن حمل إحدى البنتين لساعة وا لأخرى بعدها. استجاب الله لدعائنا". يحتفل العالم سنويًّا بالأسبوع العالمي للرضاعة الطبيعية في الفترة بين 1 و7 أغسطس؛ لتشجيع هذه الممارسة، ولتحسين صحة الأم المرضع والرضيع، ورفع الوعي بالجوانب الطبية والنفسة لها. حضرتُ دروسا في توعية الأمهات في مرحلة ما قبل الولادة، واشتريت حمالات الصدر التي ت رتديها المرضعات، وصرت مستعدة تماما لكي أكون أُمّا مرضعة. لكن بعد يومين من الولا...

राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार बताए, कैसे की डील

यी दिल्ली : भा रत और फ्रांस के बीच फाइटर प्लेन राफेल को लेकर हुई डील के खुलासे की मांग को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले को लेकर कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह राफेल सौदे पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लि फाफे में उसे सौंपे. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमू र्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि फ्रांस के साथ हुए इस सौदे के संबंध में उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए. पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गये आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है.कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में से 29 अक्टूबर तक सूचनाएं सौंपे. वह बताए कि उसने राफेल डील को कैसे अंजाम दिया है. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है. सुनवाई के दौरान केंद्र ने राफेल पर दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध किया और यह कहते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया कि राजनीतिक लाभ लेने के लि ए ये दाखिल की गयी हैं. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि राफेल सौदा राष्ट्रीय सुरक्...

सिसकता बड़ा भंगाल तड़पता गिरिपार

ड़ा भंगाल और गिरिपार क्षेत्र की परिस्थितियां विकट हैं। बेशक यहां के लोगों को इन परिस्थितियों में रहने की  आदत हो चुकी हो, मगर इनका भी हक है कि वे भी सामान्य जीवन व्यतीत करें, जिनके बारे में कोई नहीं सोच रहा। राजनीतिक मंशा भी इनको इनका हक दिलाने में कामयाब नहीं हुई है। बार-बार इन क्षेत्रों को ट्राइबल घोषित करने की मांग उठ रही है, लेकिन आज तक इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक तरफ ये क्षेत्र हैं जिन्हें ट्राइबल के दर्जे की जरूरत है और दूसरी तरफ कई क्षेत् र ऐसे हैं, जिन्हें ट्राइबल का दर्जा तो मिल चुका है, लेकिन वहां के लोग यहां रहते ही नहीं और दूसरे स्थानों में जाकर सुख-सुविधाएं भोग रहे हैं। राजनीतिक दल इन क्षेत्रों को ट्राइबल घोषित करने के वादे तो करते हैं और  बयानबाजी भी काफी होती है, परंतु नतीजा कुछ नहीं निकल सका। अभी भी इनकी मांग जस की तस है। बड़ा भं गाल पर कोई स्टडी ही नहीं दूसरी तरफ बड़ा भंगाल जिसकी और भी अधिक विकट परिस्थितियां हैं, वहां के लिए अभी तक अध्ययन भी नहीं हो सका है। प्रदेश सरकार का ज नजातीय विकास विभाग ट्राइबल घोषित करने की मांग को लेकर हि...