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ما الذي جرى للأطفال هناك؟

بيد أن الأمين العام للأمم المتحدة، أنطوني و غوتيرس، قال لمجلس الأمن الدولي في فبراير/شباط 2018 إنه أفيد أن تنظيم الدولة الإسلامية ما زال يضم في صفوفه ما بين 14 إلى 18 ألف مقاتل في سوريا والعراق، من بينهم نحو ثلاثة آلاف أجنبي . وفي الوقت الذي نُشر فيه بيان غوتيرس ، كانت قوات سوريا الديموقراطية تشن هجوما للسيطرة على الجيب الأخير من الأراضي الواقعة تحت سيطرة التنظيم في سوريا. وقد لاذ مقاتلون أجانب بالفرار من القتال الدائر حول قرية باغوز لتعتقلهم قوات سوريا الديموقراطية، ومن بينهم المراهقة البريطانية شميمة بيغوم التي ت ركت البلاد في عمر الخامسة عشر عامًا للالتحاق بتنظيم الدولة. خلص باحثون في المركز الدولي لد راسات التطرف إلى أن ما لا يقل عن 7,366 من المقاتلين الأجانب في صفوف تنظيم الدولة الإسلامية قد عادوا أدراجهم إلى بلادهم ، بينهم 256 إمرأة وقرابة 1,180 طفلاً . وحتى يونيو/حزيران 2018، عاد 3,906 مقاتلين أجان ب من الشرق الأوسط وشمال أفريقيا إلى بلادهم، و 1,765 إلى أوروبا الغربية، و784 إلى أوروبا الشرقية، و338 إلى آسيا الوسطى، و308 إلى جنوب شرقي آسيا، و156 إلى جنوبي آسيا، و97...

आशिक मसीह (दाहिने) और ईशम मसीह (बाएं)

अपने पति और बच्चे के साथ रहने वाली आसिया बीबी घर से निकलकर काम के लिए खेतों में गईं. लाहौर से दक्षिण पूर्व में क़रीब 40 मील दूरी पर उनका गांव इतानवाला काफी हरा भ रा इलाक़ा है, जहां फ लों के कई बगीचे हैं. ये पाकिस्तानी पंजा ब के सबसे उपजाऊ इलाकों में एक है. गांव की दूसरी महिलाओं की तरह आसिया इन बगीचों में काम करती थीं. वो जून का महीना था जब महिलाएं फालसा इकट्ठा करने के लिए खेतों में जमा हुई थीं. चिलचिलाती धूप में,कई घंटे काम करने के बाद थकी और प्यासी महिलाएं सुस्ताने के लिए थोड़ी देर बैठ गईं थी. कि सी ने आसिया को नज़दीक के कुएं से पानी निकालकर लाने को कहा था. उन्होंने पानी निकाला, जग में भरा और लाते वक्त प्यास के च लते उससे दो चार घूंट पानी पी लिया, इसके बाद उन्होंने जग मुस्लिम महिलाओं को थमा या. लेकिन वे सब इस बात से नाराज़ हो गईं. आप भी सोच रहे होंगे, इसमें ऐसी कौन सी बात हो गई थी. दरअसल आसिया ईसाई हैं. पाकिस्तान में कई कट्टरपंथी मुसलमान दूसरी धार्मिक आस्था वाले के हाथों से खाना पीना पसंद नहीं करते हैं. वे मानते हैं कि जो मुसलमान नहीं हैं , वे अशुद्ध होते हैं...

لماذا لفتت صورة لفستان زفاف في واجهة محل الانتباه؟

لقي محل لبيع فساتين الزفاف ثناء كبيرا لع رضه أحد الفساتين على مجسم عارضة تجلس على كرسي متحرك على واجهة المحل. وانتشرت صورة لنافذة متجر "ذا وايت كولكشن"، قرب مدينة بريستول الانجليزية، عل ى نحو كبير بعد أن شاركتها على موقع تويتر المصورة بث ويلسون. وتقول الفنانة البالغة من الع مر 36 عاما إنها تستخدم كرسيًا متحر كًا منذ خمس سنوات، لذا فإن عرض الفستان جعلها تشعر بأن هناك من يمثلها. تملك لورا ألين وأختها سارة باركر متجر الفساتين، وقالت لورا إنها شعرت بالحزن عندنا علمت أن التفكير بتمثيل النساء ذوي الإعاقة أمر نادر الح دوث. وتضيف: "من الرائع الحصول على مثل هذا الرد الإيجابي. ولكن من المحزن أيضأ أن نعلم أن هذه الخطو ة متأخرة وأن رؤية كرسي متحرك في نافذة عرض بأحد المتاجر أمر نادر". وتفاجأت المرأة البالغة 29 عاما عندما علمت أنها أول من يمثل الإعاقة بهذه الطريقة، لكن ها تأمل أن تحذو محلات أخرى حذوها. وقالت لورا: "من المعروف جدا عن هذه الصناعة عدم شم ولها لكثير من النساء، فمثلا يمكن رؤية عارضات أزياء نحيلات جدا يرتدين فساتين زفاف". وعلقت المصورة التي...

महाराजा की बेटी का निधन, 20 हजार करोड़ की संपत्ति में थी दावेदार

फरीदको ट के अंतिम महाराजा हरेंद्र सिंह बराड़ की सबसे छोटी बेटी दीपेंद्र कौर मेहताब का रविवार को फरीदकोट में निधन हो गया. दीपेंद्र 82 वर्ष की थीं और 17 अक्टूबर को अप ने पिता की बरसी में शामिल होने के लिए पश्चिमी बंगाल से फरीदको ट आई थीं. आखिरी वक्त में उनकी बेटी निशा और बेटा जयचंद मेहताब भी फरीदकोट में ही मौजूद थे. दीपेंद्र कौर मेहताब का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ सोमवार को फरीदकोट में किया जाएगा. (फोटो- हरेंद्र सिंह बराड़)दीपेंद्र का विवाह पश्चिम बंगाल के वर्दवान के एक राज परिवार में हुआ था. वह 20 हजार करोड़ रुप ए की संपत्ति की देखरेख कर रहे  महारावल खे वाजी ट्रस्ट की भी प्रमुख थीं.  (फोटो- दीपेंद्र कौर और अमृत कौर) गौरतलब है कि हरिं दर सिंह बराड़ फ रीदकोट रियासत के अंतिम शासक थे. उनका विवाह नरेंद्र कौर से हुआ था जिन से तीन बेटियां अमृत कौर, दीपेंद्र कौर, महिंपिंदर कौर और एक बेटा टिक्का हरमोहिंदर सिंह हुए थे. 80 वर्षीय अमृत कौर ने अपने पिता हरिंदर सिं ह बरार की वसीयत को करीब 26 साल प हले कोर्ट में चुनौती दी थी जिसके तहत इतनी बड़ी सं...

राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार बताए, कैसे की डील

यी दिल्ली : भा रत और फ्रांस के बीच फाइटर प्लेन राफेल को लेकर हुई डील के खुलासे की मांग को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले को लेकर कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह राफेल सौदे पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लि फाफे में उसे सौंपे. प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमू र्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि फ्रांस के साथ हुए इस सौदे के संबंध में उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए. पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह याचिकाओं में लगाए गये आरोपों को ध्यान में नहीं रख रहा है.कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह सीलबंद लिफाफे में से 29 अक्टूबर तक सूचनाएं सौंपे. वह बताए कि उसने राफेल डील को कैसे अंजाम दिया है. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है. सुनवाई के दौरान केंद्र ने राफेल पर दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध किया और यह कहते हुए उन्हें खारिज करने का अनुरोध किया कि राजनीतिक लाभ लेने के लि ए ये दाखिल की गयी हैं. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि राफेल सौदा राष्ट्रीय सुरक्...

सिसकता बड़ा भंगाल तड़पता गिरिपार

ड़ा भंगाल और गिरिपार क्षेत्र की परिस्थितियां विकट हैं। बेशक यहां के लोगों को इन परिस्थितियों में रहने की  आदत हो चुकी हो, मगर इनका भी हक है कि वे भी सामान्य जीवन व्यतीत करें, जिनके बारे में कोई नहीं सोच रहा। राजनीतिक मंशा भी इनको इनका हक दिलाने में कामयाब नहीं हुई है। बार-बार इन क्षेत्रों को ट्राइबल घोषित करने की मांग उठ रही है, लेकिन आज तक इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। एक तरफ ये क्षेत्र हैं जिन्हें ट्राइबल के दर्जे की जरूरत है और दूसरी तरफ कई क्षेत् र ऐसे हैं, जिन्हें ट्राइबल का दर्जा तो मिल चुका है, लेकिन वहां के लोग यहां रहते ही नहीं और दूसरे स्थानों में जाकर सुख-सुविधाएं भोग रहे हैं। राजनीतिक दल इन क्षेत्रों को ट्राइबल घोषित करने के वादे तो करते हैं और  बयानबाजी भी काफी होती है, परंतु नतीजा कुछ नहीं निकल सका। अभी भी इनकी मांग जस की तस है। बड़ा भं गाल पर कोई स्टडी ही नहीं दूसरी तरफ बड़ा भंगाल जिसकी और भी अधिक विकट परिस्थितियां हैं, वहां के लिए अभी तक अध्ययन भी नहीं हो सका है। प्रदेश सरकार का ज नजातीय विकास विभाग ट्राइबल घोषित करने की मांग को लेकर हि...

वायरल हुई विराट कोहली की ये टी-शर्ट, लोगों ने

बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार अ क्षय 9 सितं बर को अपना 51वां बर्थडे मनाने जा रहे हैं। अक्षय आज बॉलीवुड के जिस खास मुकाम पर पहुंच गए हैं, वहां पहुंचना इतना आसान नहीं होता। 9 सितंबर 1967 को अमृतसर में जन्मे अक्षय कुमार का वास्तविक नाम राजीव हरीओम भाटिया है। अक्षय ने फिल्म 'सौगंध' से बतौर हीरो बॉलीवुड में एंट्री ली। अक्षय फिर धीरे-धीरे बॉलीवुड के स्टार बनते गए। उन्हें एक साथ कई फिल्मों के ऑफर आने लगे। 1994 में तो ये हाल था कि अक्षय कुमार की 11 फिल्में रिलीज हुई थीं। इनके नाम हैं ऐलान, ये दिल्लगी, जय किशन, मोहरा, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, इक्के पे इक्का, अमानत, सुहाग, जख्मी दिल, जालिम और हम हैं बेमिसाल। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार के नागरिकों से अपील की है कि 15 सितम्बर से 02 अक्तूबर तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान से जुड़ें। प्रधानमंत्री 15 को इस अभियान की शुरुआत करेंगे। देश की नामी-गिरामी हस्तियों में अमिताभ बच्चन, श्री श्री रविशंकर, रतन टाटा, अक्षय कुमार, अनुष्का शर्मा, सचिन तेंदुलकर, पीबी सिंधु व साइना नेहवाल आदि इस अभियान का हिस्सा बनेंग...